भूमि,उर्जा,जल बचाओ

भूमि,उर्जा,जल बचाओ
हम और हमारा वातावरण

Tuesday, May 26, 2020

अम्ल ,क्षार,लवण

 ऐसे पदार्थ जो ,जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H^{+}) देते हैं ,अम्ल कहलाते हैं 
अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं ।
ये स्वाद में खट्टे होते हैं।
 अम्लों का PH मान 7.0 से कम होता है।
 स्वीडिश chemist Svante  Arrehenius ने सबसे पहले 1884 में अम्लीयता के गुण बताये की अम्ल H^{+}आयन देते हैं

अम्ल के प्रकार
कार्बनिक अम्ल और अकार्बनिक अम्ल
कार्बनिक अम्ल
वे कार्बनिक यौगिक जिनमें अम्लीय गुण होते हैं खट्टे फलों में प्राय: कार्बनिक अम्ल होते हैं इनमें से कुछ अम्ल सामान्यत: प्रयोगशालाओं में भी प्रयोग किये जाते हैं
अकार्बनिक अम्ल
अकार्बनिक अम्लों को खनिज अम्ल भी कहते है

सान्द्र और तनु अम्ल Concentrate and Dilute acid
सांद्र अम्ल
जब किसी अम्ल का विलय जल में किया जाता है जिसमें, जल की मात्रा  बहुत कम तथा अम्ल की मात्रा  बहुत अधिक हो, ऐसा अम्ल सांद्र अम्ल कहलाता है इस अम्ल में  हाइड्रोनियम आयन के प्रत्येक इकाई का volume ज्यादा होता है
तनु अम्ल
 जब किसी अम्ल का विलय जल में किया जाता है जिसमें, बहुत कम मात्रा में अम्ल तथा अधिक मात्रा में जल होता है, ऐसा अम्ल तनु अम्ल कहलाता है इस अम्ल में जल की मात्रा अधिक होने की वजह से हाइड्रोनियम आयन के प्रत्येक इकाई का volume कम होता है

कोई भी अम्ल सांद्र तथा तनु दोनों प्रकार का हो सकता है जैसे- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का जल के साथ विलय करने पर जब अम्ल की मात्रा अधिक होती है तो सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल  कहलाता है और अगर जल की मात्रा अधिक होती है तो तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कहलाता है

एसिटिक अम्ल – विलायक के रूप एसीटोन बनाने में ,खाद्य पदार्थों को  खट्टा करने के लिए किया जाता है

टार्टरिक अम्ल – बेकिंग पाउडर के घटक के रूप में टार्टरिक अम्ल का प्रोग किया जाता है तथा इस अम्ल का प्रयोग खाध पदार्थों में विशिष्ट खट्टा स्वाद देने के लिए भी किया जाता है

एस्कार्बिक अम्ल – इस अम्ल का उपयोग रोगों के उपचार में किया जाता है जैसे -स्कार्बी , अस्थिमज्जा से सम्बंधित रोग आदि

सिट्रिक अम्ल -खाने की चीजों में फ्लेवर के रूप में सिट्रिक अम्ल का प्रयोग किया जाता है तथा खाद्य पदार्थों और फलों  के संरक्षण में भी इस अम्ल का प्रयोग किया जाता है

सल्फ्यूरिक अम्ल -सल्फ्यूरिक अम्ल को अम्लों का राजा कहा जाता है सीसा संचायक बैटरियों में इस अम्ल का प्रयोग किया जाता है पेंट , वर्णक , रंजक आदि के निर्माण मैं इस अम्ल का प्रयोग किया जाता है कृत्रिम तंतुओं के निर्माण में इस अम्ल का प्रयोग किया जाता है जैसे -रेयान विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में भी इस अम्ल अम्ल का प्रयोग किया जाता है

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या HCL – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल हाइड्रोजन  और क्लोरिन का यौगिक है तथा बाईल जूस के साथ मिलकर हमारे पेट में भोजन पचाने का कम करता हैें HCL उपयोग किया जाता है बाथरूम cleaner में भी किया जाता है

नाइट्रिक अम्ल – दवाइयां ,फोटोग्राफी ,उर्वरक ,तथा विस्फोटक बनाने में

अम्ल के स्त्रोत
सल्फ्यूरिक अम्ल – हरा कसीस

एसिटिक अम्ल – सिरिका , आचार

टारटेरिक अम्ल – अंगूर ,इमली

साईट्रिक अम्ल – नींबू ,संतरा

लेक्टिक अम्ल –  दूध ,दही

बेन्जोइक अम्ल – घास , पत्ते

फार्मिक अम्ल –  चींटी , बिच्छू ,मधुमक्खी

ओक्सालिक अम्ल – टमाटर

मौलिक अम्ल – सेब
क्षार
 गुण ,प्रकार,उपयोग तथा उदाहरण
ब्रन्स्टेड और लोरी के अनुसार – वे पदार्थ जो जो अम्लीय पदार्थों को OH^{-}  देते हैं क्षार कहलाते हैं

ऐसा  पदार्थ जिसे जल में घोलने से जल का ph मान  7.0 से अधिक हो जाता है क्षार कहलाता  हैं क्षार लाल लिटमस पेपर नीला कर देते हैं तथा ये स्वाद में कड़वे  होते हैं ज्यादातर धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं

 क्षार के गुण या पहचान –
सांद्र क्षार अम्लीय पदार्थों के साथ तेजी से क्रिया हैं और उन्हें उदासीन बना देते हैं तथा जैविक चीजों के लिए दाहक होते हैं
बहुत से क्षार जल में विलेय होते हैं तथा कुछ क्षार जल में विलेय नहीं होते है जैसे सोडियम हाइडाक्साइड , अमोनिया जल में विलेय होते हैं और अल्युमिनियम हाइडाक्साइड जल में विलेय नहीं होते
वसा तथा तेलों से क्षार ग्लिसरीन तथा साबुन बनाने के कम आते हैं
क्षार प्रबल और दुर्बल दोनों तरह के होते हैं
क्षारों में जल मिलाने से इनकी तनुता बढ़ती है तथा सांद्रता कम होती है साथ ही साथ क्षारों का प्रभाव भी कम होता है
 क्षारों के जलीय विलयन तथा पिघले हुए क्षार विधुत के सुचालक होते हैं

क्षार के प्रकार –
पानी में घुलनशीलता के आधार पर क्षार को दो भागों  में बाटा गया है

एल्कैली Alkali
क्षारक Base

एल्कैली
ऐसे क्षार जो  पानी में घुलनशील होते हैं एल्कैली कहलाते हैं , लिथियम ,सोडियम ,पोटेशियम आदि एल्कैली धातु कहलाते हैं साथ ही Alkaline earth metals के हाइड्रोक्साइडो को भी एल्कैली कहते हैं जैसे- पोटेशियम हाइड्रोक्साइड , कैल्शियम  हाइड्रोक्साइड , सोडियम हाइड्रोक्साइड

क्षारक
ऐसे  क्षार जो पानी में अघुलनशील होते हैं क्षारक कहलाते हैं अधिकाशः तौर पर क्षार पानी में अघुलनशील होते है अर्थात क्षारक होते है क्षारक वे पदार्थ हैं जो अम्ल के साथ मिलकर लवण और जल बनाते हैं जैसे कास्टिक सोडा

 प्रबल क्षार 
ऐसे  क्षार जो जल में घुलकर पूर्णतः विभाजित होकर हाइड्रोक्साइड आयन देते हैं प्रबल क्षार कहलाते हैं ,सोडियम हाइड्रोक्साइड , पोटेशियम हाइड्रोक्साइड प्रबल क्षार के उदाहरण हैं

दुर्बल क्षार 
ऐसे क्षार जो जल में पूर्णत: विभाजित नहीं होते तथा आंशिक रूप से विभाजित होकर हाइड्रोक्साइड आयन देते हैं दुर्बल क्षार कहलाते हैं , मेगनिशियम हाइड्रोक्साइड , अमोनियम हाइड्रोक्साइड दुर्बल क्षार के उदाहरण हैं

 क्षार के उपयोग
अमोनियम हाइड्रोक्साइड कपड़ों पर लगे ग्रीज़ के दाग धब्बे हटाने के कम आता है
मेगनेशियम हाइड्रोक्साइड का उपयोग “antacid” के रूप में ,पेट में अम्ल के प्रभाव को कम करने के लिए तथा अपच के उपचार में किया जाता है
सोडियम कार्बोनेट का उपयोग कपडे धोने के साबुन बनाने के लिए और खारे पानी को मीठे पानी में बदलने के लिए किया जाता है 
कैल्शियम हाइड्रोक्साइड का उपयोग ब्लीचिंग पाउडर बनाने में किया जाता है तथा फक्ट्रियों एवं बिजिली संयंत्रो से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड को स्वच्छ करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है
सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट या सोडियम बाई कार्बोनेट का उपयोग खाने में बेकिंग सोडा के रूप में किया जाता है
क्षार और क्षारक दोनों एक ही शब्द नही हैं अर्थात सभी क्षार क्षारक हैं पर सभी क्षारक क्षार नही हैं  क्षारक, क्षार का ही एक गुण है

 लवण (Salt) 
वह यौगिक है जो किसी अम्ल के एक, या अधिक हाइड्रोजन परमाणु को किसी क्षारक के एक, या अधिक धनायन से प्रतिस्थापित करने पर बनता है। खानेवाला नमक एक प्रमुख लवण है। रसायनत: यह नमक सोडियम और क्लोरीन का सोडियम क्लोराइड नामक यौगिक है।

 लवण की pH: 
सभी प्रकार के लवणों जलीय विलयनों की pH समान नहीं होती है। (i) प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार के लवण : सोडियम क्लोराइड (NaCl), पोटेशियम नाइट्रेट (KNO3), सोडियम सल्फेट (Na2SO4), इत्यादि इस श्रेणी के लवण है। इन लवणों को जलीय विलयन (pH = 7) उदासीन होते है।
ये सामान्य लवण जैसे NaCl, KCl और Na2SO4; अम्ल लवण NaHCO3 और NaH2PO4 की तरह; और द्विक लवण (double salts) जैसे KAl (SO4) 2 हो सकते हैं।
लवणों का निर्माण निम्नलिखित रीतियों से होता है :

(1) धातुओं पर अम्लों की क्रिया से, जैसे यशद पर सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया से ज़िंक सल्फेट प्राप्त होता है।

(2) क्षार, या क्षारकों तथा कार्बोनेटों पर अम्लों, या अम्लीय ऐनहाइड्राइडों की क्रिया से, जैसे पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड पर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की क्रिया से पोटैशियम क्लोराइड बनता है।

(3) तत्वों के सीधे संयोग से, जैसे सोडियम एवं क्लोरीन के सीधे संपर्क से सोडियम क्लोराइड बनता है।

(4) अम्लीय ऑक्साइडों और क्षारक ऑक्साइडों के संयोजन से, जैसे सल्फर ट्राइऑक्साइड (अम्लीय) एवं पोटैशियम ऑक्साइड (क्षार) के संयोजन से पोटैशियम सल्फेट बनता है।

(5) किसी लवण की एक धातु को दूसरी धातु से विस्थापित करने से, जैसे कॉपर सल्फेट को लोहे के संपर्क में लाने से ताँबे का स्थान लोहा ले लेता है, जिससे फेरस सल्फेट बनता है।

(6) किसी लवण एवं कम वाष्पशील अम्ल की परस्पर अभिक्रिया द्वारा, जैसे सोडियम क्लोराइड पर अल्प वाष्पशील सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया से सोडियम हाइड्रोजन सल्फेट बनता है।

(7) लवण पर क्षार की क्रिया से, जैसे अमोनियम क्लोराइड पर पोटैश की क्रिया से पोटैशियम क्लोराइड बनता है।

(8) दो क्षारों की परस्पर क्रिया से, जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड पर ज़िंक हाइड्रॉक्साइड की क्रिया से सोडियम ज़िंकेट बनता है।

(9) धातु एवं क्षारक की परस्पर क्रिया से, जैसे ज़िंक पर पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड की क्रिया से पोटैशियम ज़िंकेट बनता है।

(10) दो लवणों के बीच उभय अपघटन से, जैसे पोटैशियम क्लोराइड तथा सोडियम नाइट्रेट से पोटैशियम नाइट्रेट एवं सोडियम क्लोराइड बनते हैं। इस रीति से जल में विलेय दो लवणों, जैसे सिल्वर नाइट्रेट तथा पोटैशियम क्लोराइड, के उभय अपघटन से जल में अविलेय सिल्वर क्लोराइड तथा जल में विलेय पोटैशियम नाइट्रेट प्राप्त होते हैं।

 सामान्यतः जल में अविलेय लवण की प्राप्ति में इस रीति का विशेष रूप से उपयोग होता है।











No comments:

Post a Comment