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Monday, August 17, 2020
Sunday, June 14, 2020
मच्छर भगाओ जीवन बचाओ,
पोस्टर,चित्र,स्लोगन
डेंगू बुख़ार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। डेंगू का इलाज समय पर करना बहुत जरुरी होता हैं. मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते (या फैलाते) हैं। डेंगू बुख़ार को "हड्डीतोड़ बुख़ार" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों। डेंगू बुख़ार के कुछ लक्षणों में बुखार; सिरदर्द; त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द शामिल हैं। कुछ लोगों में, डेंगू बुख़ार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं। पहला, डेंगू रक्तस्रावी बुख़ार है, जिसके कारण रक्त वाहिकाओं (रक्त ले जाने वाली नलिकाएं), में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स (जिनके कारण रक्त जमता है) का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है।
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चमकी बुखार
जिससे बुखार से बिहार में सैकड़ो बच्चो की मौत हुई
आपको इससे बचने के लिए गन्दे पानी को नही पीना है
अधिकतर बच्चों की मौतें हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब्लड शुगर के कारण हुई हैं
इस बुखार में बच्चो में शुगर और सोड़ियम कम हो जाता है
गर्मी में तेज धूप और पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इस वजह से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, थकान, लकवा, मिर्गी, भूख में कमी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. चमकी बुखार के लक्षण भी ऐसे ही हैं.
यह बीमारी शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. बहुत ज्यादा गर्मी एवं नमी के मौसम में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है. इस मौसम में इसकी तीव्रता भी काफी बढ़ जाती है, धूप से बचना है,हाथ अच्छे से धोने हैं
Sunday, May 31, 2020
कक्षा -9 पाठ-7 विज्ञान जैवो में विविधता
जन्तु जगत का वर्गीकरण Classification of the Animal Kingdom. वर्गिकी (Taxonomy): जन्तु विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तुओं का नामकरण एवं वर्गीकरण (Classification) किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सम्बन्धित जन्तुओं को एक निश्चित समूह में रखकर शेष जन्तुओं से पृथक किया जाता है।
जन्तु जगत का वर्गीकरण (Taxonomy of Animal Kingdom) |
1.एक कोशिकीय (Unicellular) - प्रोटोजोआ (Protozoa)
2. बहुकोशिकीय (Multi Cellular) - मेटाजोआ (Metazoa)
मेटाजोआ (Metazoa) के अंतर्गत -
↓
1. मेरूरज्जु विहीन (Non-Chordata)
सीलेन्टरेटा (Coeleterata) (9000) (उदा. हाइड्रा)
मोलस्का (Mollusca) (80000) (उदा. घोंघा, ऑक्टोपस
प्लेटीहेल्मिन्थीज (Platyhelminthes) (6000) (उदा. फीताकृमि)
एस्केल्मिन्थीज (Aschelminthes) (300) (उदा. एस्केरिस)
आथ्रोपोडा (Orthropoda) (863000) (उदा. मच्छर, काकरोच)
इकाइनोडर्मेटा (Echinodermata) (4000) (उदा. तारा मछली)
पादप वर्ग
पादप वर्गिकी को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है :“पादप वर्गिकी वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पौधों की पहचान, नामकरण एवं वर्गीकरण के बारे में अध्ययन किया जाता है।
वनस्पति जगत का वर्गीकरण (Classification of Plant Kingdom)
वनस्पति विज्ञान का जनक (Father of Botany) थियोफ्रेस्ट्स (Theophrastus) को कहा जाता है। सर्वप्रथम थियोफ्रेस्ट्स ने पौधों को उनके स्वभाव व आकार के आधार पर शाक (Herbs), झाड़ी (Shrubs) तथा वृक्ष (Trees) में विभाजित किया था।
इन्होंने अपनी पुस्तक Historia plantarum में 480 पौधों का वर्णन किया है।
उसके बाद
कैरोलस लिनियस (Carolus Linnaeus)– ने 1737 में अपनी पुस्तक (Genera plantarum) में समस्त पौधों को 24 वर्गों में वर्गीकृत किया। उन्होंने समस्त पुष्प धारी पौधों को 23 वर्गों में विभाजित किया तथा उन सभी पौधों को जिनमें पुष्प नहीं होते 24 में वर्ग Cryptogamia में रखा।
इन्होंने पुष्पधारी पौधों (Flowering plants) को पुष्पों में पाए जाने वाले पुंकेसरों (Stamens) की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया और इस प्रकार प्रथम बार पादप वर्गीकरण की लैंगिक प्रणाली (Sexual system) प्रस्तुत की। इस उपलब्धि के कारण
कैरोलस लिनियस को आधुनिक वर्गिकी का जनक कहा जाता है।
पौधों की विस्तृत वर्गीकृत स्थिति का ज्ञान जिन इकाइयों द्वारा होता है, उन्हें वर्गीकरण की इकाई कहते है जैसे -
1. जगत (Kingdom)
2. प्रभाग (Division)
3. उप प्रभाग (Sub-division)
4. संवर्ग (Class)
5. उपसंवर्ग (Sub-Class)
6. गण (Order)
7. उप गण (Sub-order)
8. कुल (Family)
9. उपकुल (Sub-Family)
10. ट्राइब (Tribe)
11. सब-ट्राइब (Sub-tribe)
12. वंश (Genus)
13. उप-वंश (Sub-genus)
14. जाति (species) - (sps.)
15. उप-जाति (Sub-species) - (ssp.)
16. किस्म (Variety) - (var.)
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