भूमि,उर्जा,जल बचाओ

भूमि,उर्जा,जल बचाओ
हम और हमारा वातावरण

Friday, May 29, 2020

कक्षा 8 विज्ञान पाठ 7 पोधे एवं जन्तुओं का सरंक्षण

 वन्य जीवों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
प्रकृति और अन्य वन्यजीव प्रजातियों के महत्व को पहचानने के लिए वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है। लुप्तप्राय पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान के साथ रक्षा करना भी ज़रूरी है।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम कब पारित किया गया?
भारत सरकार ने वर्ष 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था. इसका मकसद वन्यजीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. इसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया
वन्यजीवों में ऐसे वनस्पति और जीव (पौधें, जानवर और सूक्ष्मजीव) शामिल हैं, जिनका मनुष्यों के द्वारा पालन-पोषण नहीं होता हैं.

 संरक्षण के उपाय
1. लुप्तप्राय जानवरों या पक्षियों की हत्या और उनपर कब्जा करने पर प्रतिबंध लगाने के लिए कुछ कानून बनाए जाने चाहिए। यह एक दंडनीय अपराध होना चाहिए। ऐसे कानूनों को सकती से लागू किया जाना चाहिए और यह केवल कागज़ पर ही नहीं रह जाए इसका भी ध्यान देना अनिवार्य हैं.
2. जंगली पक्षियों और जानवरों की अंधाधुंध हत्या, चाहे बहुतायत में हो, वन अधिकारियों द्वारा अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
3. पूरे देश में जंगली जानवरों और पक्षियों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों की अधिक संख्या की स्थापना की जानी चाहिए।
4. सरकार के विभाग को वनों के संरक्षण के संबंध में सभी वनों में आवधिक सर्वेक्षण करना चाहिए। उन्हें जंगली जानवरों और पक्षियों की सभी प्रजातियों की आबादी के बारे में ज्ञान होना चाहिए, जिससे कि उन्हें बाढ़ और अकाल के समय मदद मिल सके।
विशेष रूप से हमारे द्वारा भी विलुप्त होने वाले जंगली जानवरों और पक्षियों के लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि वे विलुप्त होने से बच सकें।
5. ईंधन के लिए जंगल में पेड़ों से लकड़ीयों का अनाधिकृत रूप से काटना तुरंत बंद होना चाहिए। क्योंकि वनों की कमी जंगली जानवरों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को नष्ट कर देती है।
6. हर एकड़ जंगल से पेड़ों की कटाई के लिए सरकार के प्राधिकरण मामले में, लंबे समय तक नुकसान को पूरा करने के लिए पौधों को लगाया जाना चाहिए।
7. यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने आसपास पेड़ लगाएं और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।
8. लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए प्रजनन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए।
9. विशेष रूप से हमारे द्वारा भी विलुप्त होने वाले जंगली जानवरों और पक्षियों के लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी ध्यान दि ये भया जाना चाहिए ताकि वे विलुप्त होने से बच सकें।

भारत के  राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
गिर वन राष्ट्रीय उद्यान
गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान
खांगचेन्दोंगा राष्ट्रीय उद्यान
गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान
मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान
हेमिस राष्ट्रीय उद्यान
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान 
बन्दीपुर राष्ट्रीय उद्यान
मानस राष्ट्रीय उद्यान
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
पेंच राष्ट्रीय उद्यान
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान
डाचिगम राष्ट्रीय उद्यान
बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान -मध्य प्रदेश (बाघ, तेंदुआ, सांभर, भालू, चकोर)
नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान

अभयारण्य का अर्थ है अभय + अरण्य। अर्थात अभय घूम सकें जानवर, ऐसा अरण्य या वन। सरकार अथवा किसी अन्य संस्था द्वारा संरक्षित वन, पशु-विहार या पक्षी विहार को अभयारण्य कहते हैं।
राज्य  

प्रमुख वन्यजीव प्राणी राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य

1.

पलामू अभ्यारण्य-झारखंड-(हाथी, हिरण, तेंदुआ, सांभर, जंगली सूअर)

2.दाल्मा वन्य जीव अभ्यारण्य-झारखंड( हाथी हिरण, तेंदुआ, भालू, जंगली सूअर  

3.हजारीबाग वन्य जीव अभ्यारण्य-झारखंड(चीता, भालू, तेंदुआ, चीतल, सांभर, जंगली सूअर)

4.कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य-बिहार-(बाघ, नीलगाय, घड़ियाल, सांभर, जंगली सूअर

5.गिर राष्ट्रीय उद्यान-गुजरात-(शेर, सांभर, तेंदुआ, जंगली सूअर)

6.नल सरोवर अभ्यारण्य- गुजरात-(जल-पक्षी)

7.जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान-उत्तराखंड-(हाथी, बाघ, चीता, हिरण, भालू, नीलगाय, सांभर, जंगली सूअर)

8.दुधवा राष्ट्रीय उद्यान-उत्तर प्रदेश(हाथी, बाघ, चीता, हिरण, नीलगाय, तेंदुआ)

9.चन्द्रप्रभा अभ्यारण्य-उत्तर प्रदेश-(चीता, भालू, नीलगाय, तेंदुआ, सांभर)

10.बन्दीपुर राष्ट्रीय उद्यान-कर्नाटक-(हाथी, चीता, तेंदुआ, हिरण, चीतल, सांभर)

11.भद्रा अभ्यारण्य-कर्नाटक-(भालू, हाथी, सांभर, तेंदुआ, हिरण)

12.सोमेश्वर अभ्यारण्य-कर्नाटक-(चीता, जंगली कुत्ता, हिरण, तेंदुआ, सांभर)

13.तुंगभद्रा अभ्यारण्य-कर्नाटक-(तेंदुआ, चीतल, काला हिरण, चौसिंगा और पक्षी)

14.पाखाल वन्य जीव अभ्यारण्य-आंध्र प्रदेश-(चीता, तेंदुआ, सांभर, भालू, जंगली सूअर)

15.कावला वन्य जीव अभ्यारण्य -आंध्र प्रदेश-(चीता, तेंदुआ, सांभर, भालू, जंगली सूअर, चीतल)

16.मानस राष्ट्रीय उद्यान-असम-,(हाथी चीता, भालू, एक सींग वाला गेंडा, लंगूर, हिरण)

17.काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान-असम-(चीता, एक सींग वाला गेंडा, हुन्गली सूअर, भैंसा)

18.घाना पक्षी विहार-राजस्थान-(सांभर, काला हिरण, जंगली सूअर, मुर्गा, घड़ियाल, साइबेरियन क्रेन)

19.रणथम्भौर अभ्यारण्य -राजस्थान-(चीता, बाघ, शेर, तेंदुआ, लक्कड़बग्घा, भालू, नीलगाय, सांभर)

20.कुंभलगढ़ अभ्यारण्य-राजस्थान-(चीता, नीलगाय, सांभर, भालू)

21.पेंच राष्ट्रीय उद्यान-मध्य प्रदेश-(चीता, नीलगाय, सांभर, भालू, जंगली सूअर)

22.तंसा अभ्यारण्य-महाराष्ट्र-(तेंदुआ, सांभर, चौसिंगा, जंगली सूअर, चीतल, पक्षी)

23.वोरिविली राष्ट्रीय उद्यान-महाराष्ट्र-(लंगूर, हिरण, सांभर, तेंदुआ, जंगली सूअर)

24.अबोहर अभ्यारण्य-पंजाब-(जंगली सूअर, हिरण, नीलगाय, काला हंस, कबूतर)

25.चिक्ला अभ्यारण्य-ओडिशा-(क्रेन, जलकौवा, पेलिवन,प्रवासी पक्ष

26.सिम्लिपाल अभ्यारण्य-ओडिशा-(हाथी, बाघ, चीता, तेंदुआ, सांभर, हिरण, मगरमच्छ, जलीय पक्षी)

27.वेदांतगल अभ्यारण्य-तमिलनाडु-(जलीय पक्षी)

28.इंदिरा गांधी अभ्यारण्य-तमिलनाडु-(हाथी, बाघ, चीतल, तेंदुआ, सांभर, रीछ, जंगली कुत्ता, लंगूर)

29.मुदुमलाई अभ्यारण्य-तमिलनाडु-(हाथी, चीता, तेंदुआ, सांभर, हिरण, जंगली कुत्ते)

30.डाम्फा अभ्यारण्य-मिजोरम-(कोबरा, चीता, बिल्ली, फीजेंट)

31.पेरियार अभ्यारण्य-केरल-(चीता, हाथी, तेंदुआ, सांभर, हिरण, भालू, नीलगाय, जंगली सूअर)

32.पराम्बिकुलम अभ्यारण्य-केरल-(चीता, हाथी, तेंदुआ, सांभर, हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर)

33.कान्हा राष्ट्रीय उद्यान-मध्य प्रदेश-(बाघ, चीतल, तेंदुआ, सांभर, बारहसिंघा)

34.पंचमढ़ी अभ्यारण्य-मध्य प्रदेश-(बाघ, तेंदुआ, सांभर, नीलगाय, चीतल, हिरण, भालू, जंगली भैंसा)

35.डाचिगम राष्ट्रीय उद्यान-जम्मू-कश्मीर-(तेंदुआ, काला भालू, लाल भालू, हिरण)

36.किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान-जम्मू-कश्मीर-(काला हिरण, जंगली याक, तिब्बती गधा)

37.बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान-मध्य प्रदेश-(बाघ, तेंदुआ, सांभर, भालू, चकोर)

38.नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान-कर्नाटक-,(चीता हाथी, तेंदुआ, सांभर, भालू, चकोर, तीतर)

39.पखुई वन्य जीवन अभ्यारण्य-अरुणाचल प्रदेश(हाथी, अजगर, हिरण, सांभर)

40.सुल्तानपुर झील अभ्यारण्य-हरियाणा-(विभिन्न जल पक्षी)

41.रोहिला राष्ट्रीय उद्यान-हिमाचल प्रदेश-(कस्तूरी हिरण, भूरा भालू, पहाड़ी मुर्गा, पहाड़ी तेंदुआ)

42.सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान-पश्चिम बंगाल-(बाघ, चीता, हिरण, मगरमच्छ)

43.भगवान् महावीर उद्यान-गोवा-(हिरण, चूहा, साही, सांभर)

44.नोंगखाइलेम अभ्यारण्य-मेघालय-(हाथी, चीता, बाघ, हिरण, सांभर, भालू)

45.कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान-मणिपुर(हिरण, जंगली बकरी, विभिन्न जल पक्षी)

प्रश्न 5. संक्षेप में उत्तर दीजिए

(क) हमें जैव विविधता का संरक्षण क्यों करना चाहिए ?
(ख) संरक्षित वन भी वन्य जंतुओं के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है, क्यों ?
(ग) कुछ आदिवासी वन (जंगल) पर निर्भर करते हैं। कैसे ?
(घ) वनोन्मूलन के कारक और उनके प्रभाव क्या हैं ?
(ङ) रेड डाटा पुस्तक क्या है ?
(च) प्रवास से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- (क) जैव विविधता का अर्थ है किसी क्षेत्र विशेष में पाए जाने वाले सभी पौधों, जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की विभिन्न प्रजातियाँ। जंतु जो पौधों पर आश्रित हैं वे भी अपनी आदतों पर निर्भर करते हैं जैसे कि वाल पांडा बैंबू डंडी खाना पसंद करता है और ऑस्ट्रेलिया का कुऊाला भालू सफेदे के पत्ते ही खाना पसंद करता है। पक्षी और बारहसिंघा की भी विशेष खाने की आदतें होती हैं। वन में विभिन्न पौधे प्रत्येक की आवश्यकता पूरी करने में समर्थ होते हैं। इससे शाकाहारी को भोजन मिलता है, भोजन श्रृंखला मजबूत होती है। इसलिए जंतुओं के संरक्षण के लिए विविध पेड़-पौधों का संरक्षण भी अति आवश्यक है।

(ख) संरक्षित वन भी जीवों के लिए संरक्षित नहीं रहे क्योंकि इनके आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वनों का अतिक्रमण करके उन्हें नष्ट कर देते हैं।

(ग) कुछ आदिवासी जातियाँ वनों पर निर्भर होती हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान की चट्टानों में आवास के प्रागैतिहासिक प्रमाण मिले हैं जिनसे आदिमानव के जीवनयापन के बारे में पता चलता है। चट्टानों पर कुछ कलाकृतियाँ जैसे लड़ते हुए मनुष्य और जानवर का शिकार, नृत्य एवं वाद्ययंत्रों को बजाते हुए दर्शाया गया है। बाघ और लोगों के समूहों की कलाकृतियाँ भी इन चट्टानों पर पाई गई हैं। कई आदिवासी आज भी जंगलों में रहते हैं।

(घ) वनोन्मूलन के कारण- लोगों के बदलते जीवन स्तर और तकनीकी वृद्धि से वनों के उपयोग में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अपने आराम और सुविधाओं के लिए वृक्षों की कटाई के निम्न उद्देश्य हैं

(I) जनसंख्या वृद्धि के कारण घर बनाने की लकड़ी के लिए।
(Ii) कृषि भूमि के लिए।
(Iii) सड़कें और बाँधों के निर्माण के लिए।
(Iv) पशुओं के अतिचरण के लिए।
(V) खानों में वृद्धि के लिए।

वनोन्मूलन के प्रभाव- वनोन्मूलन के मुख्य दुष्प्रभाव हैं

(I) ऑक्सीजन/कार्बन डाइऑक्साइड के अनुपात का असंतुलन
(Ii) अधिक बाढ़े
(Iii) भू-स्ख लन
(Iv) जलवायु परिवर्तन ।
(V) वन में रहने वाले पशु-पक्षियों का नष्ट होना या प्रवास करना
(Vi) स्थलीय जल में कमी
(Vii) दवाइयों वाले पौधे नष्ट हो जाते हैं।
(Viii) भूमि की उर्वरकता में कमी
(Ix) लकड़ी और रबड़ उद्योगों में गिरावट ।

(ङ) रेड डाटा पुस्तक- यह पुस्तक संकटापन्न स्पीशीज़ के रिकार्ड का स्रोत है। पौधे, जंतुओं और अन्य स्पीशीज के लिए अलग-अलग रेड डाटा पुस्तकें हैं।

(च) प्रवास (Migration)- कुछ स्पीशीजों द्वारा अपने आवास से किसी निश्चित समय में बहुत दूर जाना प्रवास कहलाता है। प्रवास अधिकतर पक्षियों में पाया जाता है। पक्षी जलवायु परिवर्तन के कारण प्रवास करते हैं जैसे चपटे सिर वाली बतख, सुरखराब आदि प्रवासी पक्षी हैं।
साइबेरियन क्रेन
प्रश्न 6.-पारितन्त्र के दो घटक कोन से हैं
उत्तर-जैव घटक,अजैव घटक


प्रश्न 7. अपने स्थानीय क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने में आप किस प्रकार योगदान दे सकते हैं ? अपने द्वारा की जाने वाली क्रियाओं की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर- हरी संपदा का रख-रखाव

(I) सड़कों के दोनों ओर वृक्ष लगाने चाहिएं।
(Ii) वनों के काटने पर रोकथाम लगानी चाहिएं।
(Iii) सरकार को अधिक वृक्ष काटने पर रोक लगाने के कानून बनाने चाहिएं।
(Iv) विशेष क्षेत्रों में पार्क (उद्यान) बनाने चाहिएं।

प्रश्न 8. वनोन्मूलन से वर्षा दर किस प्रकार कम हुई है ? समझाइए।
उत्तर- वन वर्षा लाने में सहायक होते हैं। इसलिए वनोन्मूलन से वर्षा में कमी आती है और भूमि की उर्वरकता में कमी आती है। जिस कारण प्राकृतिक आपदाएँ आने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं।

प्रश्न 9. हमें कागज़ की बचत क्यों करनी चाहिए ? उन कार्यों की सूची बनाइए जिनके द्वारा आप कागज़ की बचत कर सकते हैं ?
उत्तर- एक टन कागज़ की उत्पत्ति के लिए 17 हरे-भरे पेड़ चाहिएं। इसलिए हमें कागज़ की बचत करनी चाहिए। कागज़ का 5-7 बार पुन:चक्रण हो सकता है। हमें कागज़ को बचाना चाहिए, उपयोग में आए कागज़ को पुन:उपयोग में लाना चाहिए और पुनः चक्र करना चाहिए। इससे वनों के साथ-साथ पानी और ऊर्जा की बचत होती है। हानिकारक रसायनों के उपयोग में भी कमी आती है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. रिक्त स्थान भरो
(I) पृथ्वी की ऊपरी मिट्टी की परत का हटना ………….. कहलाता है।
(Ii) वन में पाए जाने वाले जंगली पौधे और जंतु ………….. कहलाते हैं।
(Iii) पौधों को ………….. गैस प्रकाश संश्लेषण के लिए चाहिए।
(Iv) उर्वर भूमि का रेगिस्तान में परिवर्तन होना ………….. कहलाता है।
(V) ………….. वह क्षेत्र है, जहाँ सजीवों का आवास है और जीवन को सहारा देता है।
(Vi) ………….. से तात्पर्य है पृथ्वी पर पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियाँ।
(Vii) किसी विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले पशु-पक्षी और जीव-जंतु और ………….. कहलाते हैं।
(Viii) पंचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में एक राष्ट्रीय उद्यान ………….. , दो वन्य जंतु अभ्यारण्य और ………….. आते हैं।
(Ix) एक विशेष क्षेत्र में पाए जाने वाले स्पीशीज़ को ………….. कहते हैं।
(X) ………….. सजीवों की समष्टि का समूह है, जो एक-दूसरे से अंतर्जनन करने में सक्षम होते हैं।

उत्तर-(I) मृदा अपरदन, (Ii) वन्य जंतु, (Iii) कार्बन डाइऑक्साइड, (Iv) मरुस्थलीकरण, (V) जैव-मंडल, (Vi) जैवविविधता, (Vii) वनस्पति जात, प्राणिजात, (Viii) सतपुड़ा, बोरी, पंचमढ़ी, (Ix) विशेष क्षेत्री स्पीशीज, (X) स्पीशीज।

प्रश्न 2. वनोन्मूलन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-वनों का काटना और उस भूमि का उपयोग दूसरे उद्देश्यों के लिए करना वनोन्मूलन कहलाता है।

प्रश्न 3. वनोन्मूलन के प्राकृतिक कारक बताइए।
उत्तर-दावानल और भीषण सूखा वनोन्मूलन के प्राकृतिक कारक हैं।

प्रश्न 4. वर्षा और भूमि की उर्वरकता में कमी के क्या प्रभाव हैं ?
उत्तर-इनसे प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़ और सूखा) की संभावना बढ़ती है।

प्रश्न 5. प्रकाश संश्लेषण के लिए पौधों को कौन-सी गैस की आवश्यकता होती है ?
उत्तर-पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6. पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड गैस की वृद्धि से क्या होगा ?
उत्तर-इससे विश्व ऊष्मण होगा।

प्रश्न 7. सूखा का क्या कारण है ?
उत्तर- भूमि पर ताप में वृद्धि से सूखा पड़ता है।

प्रश्न 8. मरुस्थलीकरण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-मरुस्थलीकरण-उर्वर भूमि का रेगिस्तान में परिवर्तन, मरुस्थलीकरण कहलाता है।

प्रश्न 9. उस स्थान का नाम लिखें जहाँ पौधे एवं जंतु ऊपरी हिमालय की श्रृंखलाओं एवं निचले पश्चिमी घाट के समान हैं।
उत्तर-पंचमढ़ी जैवमंडलीय संरक्षित क्षेत्र।

प्रश्न 10. सरकार वनों एवं वन्य जंतुओं के संरक्षण के लिए क्या करती है ?
उत्तर-सरकार संरक्षण और सुरक्षा हेतु नियम, विधियाँ और नीतियाँ बनाती है।

प्रश्न 11. जैवमंडल क्या है ?
उत्तर-जैवमंडल-पृथ्वी का वह भाग जिसमें सजीव पाए जाते हैं अथवा जो जीवनयापन योग्य हैं।

प्रश्न 12. जैव-विविधता की परिभाषा दीजिए।
उत्तर-जैव-विविधता से तात्पर्य पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्म जीवों की प्रजातियों के पारस्परिक संबंध और पर्यावरण से संबंध है।















                                   



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